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सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं,


दमोह मध्यप्रदेश शासन की सीएम हेल्पलाइन में दर्ज एक शिकायत No. 37442442 के निराकरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं । शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए सीएम हेल्पलाइन पर भ्रामक एवं तथ्यहीन प्रतिवेदन प्रस्तुत कर शिकायत का निराकरण कर दिया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 26 मार्च 2026 को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि वर्तमान में दमोह जिले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. राजेश कुमार अठ्या अपने निज निवास, सिविल लाइन कटनी से राज सोनोग्राफी सेंटर का संचालन कर रहे हैं। शिकायत में कहा गया कि यदि कोई शासकीय सेवक निजी व्यवसाय का संचालन करता है, तो यह मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों एवं शासकीय सेवा आचरण नियमों के विपरीत है और इसकी जांच कर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग के ही अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सौंप दी गई। उनका कहना है कि जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों को लेनदेन और अन्य तथ्यों की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कोई प्रभावी जांच नहीं की तथा सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर यह रिपोर्ट दर्ज कर दी कि डॉ. अठ्या के कटनी स्थित निज निवास पर किसी प्रकार का सोनोग्राफी सेंटर संचालित नहीं किया जा रहा है।

हालांकि शिकायतकर्ता का दावा है कि यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों से मेल नहीं खाती। उनके अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कटनी द्वारा जारी एक पत्र में सिविल लाइन स्थित परिसर में सोनोग्राफी मशीन संचालित होने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह दस्तावेज जांच रिपोर्ट पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि डॉ. अठ्या के निजी निवास पर लगे साइन बोर्ड पर उनका नाम एवं मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से अंकित है। बोर्ड पर यह भी उल्लेखित है कि वहां अनुबंधित सोनोलॉजिस्ट डॉ. ए. गुप्ता नियुक्त हैं।

वहीं शिकायतकर्ता ने कहा  किया है कि डॉ. अखिलेश कुमार गुप्ता द्वारा दिए गए एक शपथ पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि सिविल लाइन स्थित उक्त भवन में संचालित सोनोग्राफी सेंटर का संचालन उनके द्वारा किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि यह तथ्य सही हैं, तो मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि संबंधित जांच अधिकारियों ने निष्पक्षता नहीं बरती और वास्तविक तथ्यों को दबाकर शिकायत का निराकरण कर दिया। उनका कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी या स्वास्थ्य विभाग से बाहर की सक्षम संस्था से जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सत्य सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।


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