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सांप या जहरीले जन्तुओं के काटने से होने वाले नुकसान और उसके इलाज हेतु डॉ. विक्रम सिंह ने समय-सीमा बैठक में दी अहम् जानकारियां........ पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के पास लगे पोल की लाईट चालू होने से राहगीरों को मिली सुविधा

            दमोह : कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के निर्देश पर हर सप्ताह समय-सीमा बैठक के दौरान अधिकारियों को नई-नई जानकारियों से परिचित कराया जा रहा है। इसी क्रम में पीजी मेडिकल ऑफिसर डॉ. विक्रम सिंह चौहान ने इस सप्ताह सांप के काटने या जहरीले जन्तुओं के काटने से होने वाले नुकसान और उसके इलाज के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत अर्पित वर्मा, अपर कलेक्टर मीना मसराम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारीगण मौजूद थे।

            जिला अस्पताल दमोह के पीजी मेडिकल ऑफिसर डॉ. विक्रम सिंह चौहान ने बताया अभी मानसून का सीजन आ गया है, इस समय सांप के काटने के केसेस बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। जिला चिकित्सालय में लगभग 5 से 7 मरीज लगभग हर रोज सांप के काटने के आ रहे हैं। उन्होंने बताया यहां पर जो जहरीले और बिना जहरीले सांप है उसमें से 80 से 90 प्रतिशत बिना जहरीले सांप होते हैं, 10 से 20 प्रतिशत ही जहरीले सांप होते हैं, हमें सिर्फ उन्हें पहचानना रहता है।

            उन्होंने कहा जब सांप काटे तो वहां पर ज्यादा कट नहीं लगाना है, जख्म के ऊपर पट्टी या सुतरी बांध देते हैं, यह सब चीज मरीज को और ज्यादा डैमेज करती हैं। हमें लगता है कि हमने तुरंत जहर को रोक दिया है लेकिन हमारे अंदर जो नस होती हैं, उसके माध्यम से जहर तुरंत पूरे शरीर में फैल जाता है, हम कितनी ही ऊपर से पट्टी बांध लें, हम सिर्फ इससे ऊपर की नसों को रोक सकते हैं अंदर की नसों को नहीं रोक सकते हैं, जो की मसल्स के अंदर है, यह टिशूज भी डैमेज कर सकता है जो अल्टीमेटली गैंग्रीन बन सकता है और पेशेंट को कभी-कभी पैर भी कटवाना पड़ता है, तो ना हमें कट लगाना है ना ही कुछ बांधना है, सिर्फ इतना करना है कि मरीज का जो पैर है वह इममूवलाईज हो, स्प्लिंट बांधे, हम पेरीफेरीज में कहीं कुछ नहीं कर सकते है, यदि सांप जहरीला है और उसने काट लिया है। यदि सांप ने काटा तो पहले हमें मरीज का मनोबल बढ़ाना है कि अस्पताल चलते हैं ठीक हो जाएंगे, कोई बात नहीं है। क्योंकि जो सांप के काटने का डर होता है या डर इतना बड़ा होता है कि कई लोग डर के कारण ही घबराकर एंजाइटी डिसऑर्डर के कारण उनकी डेथ हो जाती है।

            डॉ.विक्रम सिंह ने बताया हमें सिर्फ पेशेंट को कंट्रोल करना है कि आपको कुछ नहीं होगा अस्पताल ले चल रहे हैं, दवाई लग जाएगी ठीक हो जाओगे। हमें कुछ लक्षण पहचानने होते हैं जैसे सांस लेने में दिक्कत तो नहीं है, पलकें नींचे तो नहीं गिर रही है, या पेशेंट की जीभ बाहर तो नहीं निकल रही है, यदि यह लग रहा है तो समझ जाए कि सांप का जहर चढ़ चुका है, तुरंत अस्पताल ले जाना है, इससे ज्यादा हम कुछ नहीं कर सकते हैं, जो भी कुछ करना है अस्पताल के जो ट्रेंड डॉक्टर है वह करेंगे। यदि सांस रूकती है तो मरीज को इनक्यूबेट करके वेंटीलेटर में डालना पड़ेगा, बाकी यदि एंटी स्नेक वेनम है जो कि सभी शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध रहते हैं, कहीं भी यदि आप जाते हैं, सांप ने काटा है, आप बताएंगे तो आपको प्रायमरी ट्रीटमेंट दिया जाएगा और एंटी स्नेक वेनम जितनी जल्दी हो सके स्टार्ट करना है। यही बचाव है बाकी बचावों में बड़े जूते पहने, अंधेंरे में टॉर्च लेकर चले, जहां जानवर रहते है वहां जाने से बचे क्योंकि वहां सांप आते है।

 

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पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के पास लगे पोल की लाईट चालू होने से

राहगीरों को मिली सुविधा

        

      दमोह : इलेक्ट्रिकल कांट्रैक्टर हरिनारायण साहू पी.डब्ल्यू.डी. एवं अन्य विभागों में इलेक्ट्रिकल से संबंधित कार्य करते हैं। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर की प्रेरणा से खुश होकर इन्होंने पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के पास लगे पोल की लाईट को चालू कराया है। यह लाइट लगभग 15 फुट से 20 फुट के रेडियस को कवर कर रही है, जिससे वहां से निकलने वाले राहगीरों को सुविधा हो रही है।

            श्री हरिनाराण साहू का कहना है कुछ समय पहले से देख रहा हूं कि कलेक्टर सर विभिन्न जगह स्वच्छता अभियान तालाबों की सफाई जन सहयोग से कर रहे हैं, उनसे प्रेरित होकर मैंने सोचा कि मैं भी कुछ कर सकूं, क्योंकि मैं इलेक्ट्रिकल फील्ड से संबंधित हूं, तो बहुत दिनों से मैं यह देख रहा था कि जैसे पॉलिटेक्निक कॉलेज, पीजी कॉलेज और बेलाताल के पास डेकोरेटिव पोल्स पर लाइट लगी हुई थी, वह बहुत समय से बंद पड़ी हुई थी, बहुत समय से न्यूज पेपर में भी पड़ा था कि चालू नहीं हो पा रही है, उनका मटेरियल नहीं मिल पा रहा है या कुछ अन्य इश्यूज थे। मुझे लगा कि मैं इसमें कुछ कर सकूं, मैंने कलेक्टर सर से बात की, कलेक्टर सर ने कहा कि आप काम करिए, इसके बाद पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास जो लाइट लगी हुई है उसमें से 10 पोल जो लगे हुए हैं उनमें 20 लाइट लगी हुई है उनको चालू किया है, इसके लिए अहमदाबाद और पुणे से सामान मंगवाया, जैसा कि कलेक्टर सर ने कहा था कि आप जो कर सकते हैं करें। उनमें से 10 पोल मैंने चालू किए हैं, मुझे बहुत खुशी है कि वहां पर उजाला हो गया है। यह लाइट लगभग 15 फुट से 20 फुट के रेडियस को कवर कर रही है, जिससे वहां से निकलने वाले राहगीरों को सुविधा हो रही है। उन्होंने कहा यह जो लाइट लगी है उसमें से जो बाहरी हिस्सा जो पूरा कास्ट आयरन का था, वह बस लगा हुआ है बाकी जो अंदर इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट है वह पूरा नया किया गया है।

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