‘’ रफ्ता-रफ्ता चल दिए हम जिंदगी की राहों में ‘’
दमोह । गत दिवस म.प्र. आँचलिक साहित्यकार परिषद, जिला शाखा दमोह द्वारा मुन्ना लाल पटैल के निवास फुटेरा वार्ड नं. 4 दमोह में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती विमला तिवारी ‘कल्याणी’, मुख्य अतिथि पंडित रामकुमार तिवारी, विशिष्ट अतिथि डॉ. राशिद। कार्यक्रम का सफल संचालन बलीराम पटैल ‘‘आकाशवाणी कलाकार’’ ने किया ।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में मुस्तफा अकमल ने ‘’ इक नजर जिसने भी देखा है
हमारा भारत – उसके दिल को बड़ा भाया हमारा भारत ‘’, सुऐब दमोही ने ‘’ हर
इक इंसा यहाँ सच्चा था पहले सुना है ये जहॉं अच्छा था पहले ‘’, ताहिर
दमोही ने ‘’ ये बात सच है कि शर्मिंदगी तो होती है - कभी गुनाह के पहले कभी
गुनाह के बाद ‘’। संस्था अध्यक्ष संन्यासी द्वारा युवा गजलकारों के
लिये साहित्यिक पुस्तक एवं पुष्प भेंट कर सम्मानित किया गया।
इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए डॉ. मनीषा दुबे ने ‘’ रफ्ता-रफ्ता चल दिए हम
जिंदगी की राहों में ‘’ , राजाराम राजू ने ‘’ मिट गया मन का अंधेरा जब मन
का दिया जला ‘’, बलीराम पटैल ने ‘’ लौट के राम अवध को आये – घर घर आनन्द
छाये जू – घी के दीपक जलाए जू ‘’, नंदलाल पटैल ने ‘’ हमने बृज के ग्वाले
से अपना दिल लगाया है- जब तलक देख न लूं मुझे चैन नहीं आया है ‘’ ,
रामप्रसाद पटैल ने ‘‘ जा दुनिया कोउ से चले न – बिना पत्ता हिले न ‘’,
विमला तिवारी ने ‘‘ मन मोह ना तोसे उरझ गई – राम बड़े धोखे पर गई ‘’
बुंदेली गीत के माध्यम से सभी की तालियां बटोरीं। मुकेश कुमार दुबे ने
भजन, रमेश कुमार ताम्रकार ने ‘’कोयले की दलाली में काले हाथ’’ कविता, पंडित
रामकुमार तिवारी ने रचना पाठ किया।
कार्यक्रम में रामनाथ ‘अकेला’, प्रमोद कुमार असाटी, प्रहलाद पटैल, वीरेन्द्र यादव, गोविन्द पटैल, विकास विश्वकर्मा, जयंती ‘ऋतुराज’ विश्वकर्मा, ललित पटैल, के साथ नन्हे मुन्ने बच्चों की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम सफल बनाने में रविशंकर पटैल एवं उनके मित्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मुन्नालाल पटैल ने कार्यक्रम के सफल आयोजन से प्राप्त आनन्द के लिये उपस्थित सभी रचनाकारों का हृदय से आभार माना ।
अंत में कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिये मुकेश कुमार दुबे (एडव्होकेट)
संस्था सचिव ने संस्था अध्यक्ष रामचन्द्र सिंह संन्यासी, मुन्नालाल
पटैल व उनके परिवार के द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए उपस्थित
रचनाकारों एवं श्रोताओं का आभार माना।
