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'काम कागजों में और रकम जेब में'...मैहर जिले के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का ऐसा ही बड़ा खेल उजागर हुआ है।

 मैहर/ एमपी के मैहर जिले के रामनगर अनुभाग में शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की एक बड़ी परत खुली है। यहां हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों में लघु निर्माण कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने में बड़ी सेंध लगाई गई है। जांच में खुलासा हुआ है कि अधिकारियों और निजी फर्मों की मिलीभगत से 4 करोड़ 37 लाख 89 हजार 420 रुपए का गबन किया गया है।

'काम कागजों में और रकम जेब में'...मैहर जिले के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का ऐसा ही बड़ा खेल उजागर हुआ है। अधिकारियों और निजी फर्मों की मिलीभगत से लघु निर्माण कार्यों की आड़ में करीब सवा चार करोड़ रुपए का गबन कर लिया गया। जांच में पुष्टि होने के बाद, 9 लोगों को सस्पेंड कर घोटाले में शामिल तीन फर्मों के बैंक खाते सील कर पुलिस कार्रवाई शुरू कर दी है।

कलेक्टर द्वारा गठित समिति की जांच रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने एसपी को पत्र लिखकर तीन निजी फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, घोटाले की आंच अब विभाग के कर्मचारियों तक पहुंच गई है, जिसमें अब तक 9 लोगों को निलंबित किया जा चुका है।

जांच में सामने आया है कि, शासकीय राशि का दुरुपयोग कर फर्जी भुगतान के जरिए शासन को सवा चार करोड़ से ज्यादा का चूना लगाया गया। इस खेल में तीन प्रमुख निजी फर्मों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

घोटाले की रकम को रिकवर करने और आगे की निकासी रोकने के लिए एसडीएम रामनगर ने सख्त रुख अपनाया है। तीनों आरोपित फर्मों के बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से 'होल्ड' कर दिया गया है। लीड बैंक मैनेजर को निर्देश दिए गए हैं कि 5 फरवरी 2026 के बाद इन खातों से एक भी रुपया नहीं निकलना चाहिए। यदि निकासी हुई, तो संबंधित बैंक अधिकारियों को भी अपराध में सह-आरोपी मानते हुए उन पर एफआईआर दर्ज होगी।

इस महाघोटाले की गाज अब तक 9 कर्मचारियों पर गिर चुकी है। गुरुवार को 3 और प्राचार्यों को निलंबित किया गया। अब तक कुल 9 कर्मचारी निलंबित किए जा चुके हैं। 7 अन्य प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

 

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